हमारा परिचय

श्री दिगम्बर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट की स्थापना ४ नवम्बर १९२१ को रायबहादुर सरसेठ हुकुमचंद स्वरुपचंद जी , रायबहादुर कस्तूरचंद ओंकारजी एवं रायबहादुर सेठ कल्याणमल त्रिलोकचंद जी ने की l

आश्रम के उद्देश्य

श्रमण संस्कृति के लोक हितकारी सिद्धान्तो एवं उपदेशो के व्यापक रूप से प्रचार - प्रसार तत्सम्बन्धी साहित्य का सृजन, प्रकाशन, वृद्धि एवं विस्तार करना तथा इन कार्यो से सम्बंधित संस्थाओ को योगदान देना l

भारतीय धर्म एवं दर्शन, संस्कृति आदि प्राचीन भाषाओ पर शोध करवाना एवं ऐसे शोधकर्ताओं को पुरुस्कृत करना, छात्रवृत्ति देना एवं आर्थिक सहयोग करना l इस प्रकार ज्ञानदान की विभिन्न योजनाओ को क्रियान्वित करना l

समय - समय पर समाजसेवी तथा सार्वजानिक संस्थाओ के सहयोग से श्रमण संस्कृति से सम्बंधित विषयों पर वाद - विवाद, निबंध, चित्रकला, मूर्तिकला प्रतियोगिता आयोजित करना, करवाना एवं पुरुस्कृत करना करवाना तथा शिक्षण संस्थाओ की स्थपना करना - करवाना एवं सहायता देना l उक्त उद्द्श्यो की पूर्ति उदासीन त्यागीव्रती आश्रम एवं कुंद - कुंद ज्ञानपीठ, इंदौर के माध्यम से की जा रही हैं l

जिनवाणी भी मोक्ष मार्ग का एक नक्शा हैं l कहाँ किस स्थान किस वस्तु का अस्तित्व हैं ? इस बात को बताने के जिनवाणी परम साक्षय हैं l

आज का आधुनिक विज्ञान सूर्य ऊर्जा से कई यंत्रो को संचालित कर रहा हैं | अतः 'सूर्यमंत्र' को साधना रूप सिद्धि प्राप्त करने वाले कुशल वैज्ञानिक हमारे दिगंबर साधु ही होते हैं |